"अयोध्या राज्य के राजकुमार श्री शत्रुघ्न हैं.. श्री विष्णु के सुदर्शन चक्र अवतार अयोध्या नगरी की पावन भूमि पर,, त्रेता य...
"अयोध्या राज्य के राजकुमार श्री शत्रुघ्न हैं.. श्री विष्णु के सुदर्शन चक्र अवतार
अयोध्या नगरी की पावन भूमि पर,,
त्रेता युग में जब श्री रामचंद्र का जन्म हुआ !!
दशानन रावण के अधर्म का नाश करने को,,
तब माता सुमित्रा के गर्भ सें,
श्री विष्णु के सुदर्शन चक्र ने भी अवतार लिया!!
अयोध्या साम्राज्य के राजकुमार,,
शत्रुघ्न के रूप में,, श्री राम का सहयोग करने को,,
श्री शत्रुघ्न को, एक पिता के रूप में,,
महाराज दशरथ जैसी,, एक
पुण्य आत्मा का आशीर्वाद मिला !!
राजकुमार शत्रुघ्न के,,हृदय को,,
महाराज रघु के कुल का सम्मान मिला !!
चक्रवर्ती सम्राट महाराज दशरथ के पुत्र,
श्री शत्रुघ्न ने गुरु वशिष्ठ के चरणों में बैठकर,,
ग्रहण की धर्म की शिक्षा...
राजा कुशध्वज की पुत्री श्रुतकीर्ति ने,,
मेहंदी से अपने भाग्य मे उम्र भर के लिए,,
श्री शत्रुघ्न का नाम लिखा.....
माता कैकेयी द्वारा जब श्री रामचंद्र को,,,
चौदह वर्ष का वनवास हुआ...
माँ सीता और श्री लक्ष्मण भी,,
ज़ब तत्पर हुए,, अपना धर्म निभाने को,,
श्री राम के,,संग वन के मार्ग की ओर,
अपने पग बढ़ाने को,,
महात्मा भारत ने भी जब चौदह वर्ष तक
भगवान रामचंद्र की चरण पादुका
राज सिंहासन पर रखकर,,
अयोध्या के राजमहल को त्याग कर,,
एक दास के रूप में,,
नंदीग्राम से राम के काज को,,
करने का निश्चय किया.....
तब ऐसे कठिन समय मे,,
अयोध्या की सुरक्षा का भार,,
राजकुमार श्री शत्रुघ्न पर आन पड़ा,,
श्री शत्रुघ्न ने चौदह वर्ष तक,,
श्री रामचंद्र की अयोध्या की,,
रक्षा के रूप में तपस्या करके,,
श्री रामचंद्र के परम भक्त,,
होने का प्रमाण दिया,,
चौदह वर्षों के इंतजार के बाद,,
श्री रामचंद्र का वनवास जब पूर्ण हुआ,,
तथा अयोध्या में श्री राम के राजतिलक
के साथ राम राज्य का फिर आरंभ हुआ!!
श्री रामचंद्र के राज्य में, अयोध्या में चारों ओर,,
शांति,समृद्धि न्याय और खुशहाली थी,,
अयोध्या में अब, हर दिन होली
एवं हर रात दिवाली थी,,
किंतु चक्रवर्ती सम्राट राजा रामचंद्र को,,
अपने राज्य में, मधुबन मथुरा क्षेत्र के पास,,
लवणासुर के आतंक उसके,,
अत्याचार के बारे में,,
जब ज्ञात हुआ !!
राजा रामचंद्र ने श्री शत्रुघ्न को,,
आदेश देकर भेजा !!
लवणासुर सें,, युद्ध करने को,,
श्री शत्रुघ्न ने अपने पराक्रम और,,
वीरता सें लवणासुर का अंत किया
राजा रामचंद्र ने, श्री शत्रुघ्न के,,
पराक्रम से प्रसन्न होकर,,
श्री शत्रुघ्न को मथुरा राज्य का,,
सम्राट घोषित किय !!
जब श्री रामचंद्र का कार्य,,
इस मृत्यु लोक में पूर्ण हुआ,....
उसी समय श्री राम के साथ
भरत तथा श्री, शत्रुघ्न ने भी,,
सरयू नदी में जल समाधि लेकर,,
वैकुंठ लोक प्रस्थान किया !!
कवि -, आकाश शर्मा आज़ाद"
अयोध्या नगरी की पावन भूमि पर,,
त्रेता युग में जब श्री रामचंद्र का जन्म हुआ !!
दशानन रावण के अधर्म का नाश करने को,,
तब माता सुमित्रा के गर्भ सें,
श्री विष्णु के सुदर्शन चक्र ने भी अवतार लिया!!
अयोध्या साम्राज्य के राजकुमार,,
शत्रुघ्न के रूप में,, श्री राम का सहयोग करने को,,
श्री शत्रुघ्न को, एक पिता के रूप में,,
महाराज दशरथ जैसी,, एक
पुण्य आत्मा का आशीर्वाद मिला !!
राजकुमार शत्रुघ्न के,,हृदय को,,
महाराज रघु के कुल का सम्मान मिला !!
चक्रवर्ती सम्राट महाराज दशरथ के पुत्र,
श्री शत्रुघ्न ने गुरु वशिष्ठ के चरणों में बैठकर,,
ग्रहण की धर्म की शिक्षा...
राजा कुशध्वज की पुत्री श्रुतकीर्ति ने,,
मेहंदी से अपने भाग्य मे उम्र भर के लिए,,
श्री शत्रुघ्न का नाम लिखा.....
माता कैकेयी द्वारा जब श्री रामचंद्र को,,,
चौदह वर्ष का वनवास हुआ...
माँ सीता और श्री लक्ष्मण भी,,
ज़ब तत्पर हुए,, अपना धर्म निभाने को,,
श्री राम के,,संग वन के मार्ग की ओर,
अपने पग बढ़ाने को,,
महात्मा भारत ने भी जब चौदह वर्ष तक
भगवान रामचंद्र की चरण पादुका
राज सिंहासन पर रखकर,,
अयोध्या के राजमहल को त्याग कर,,
एक दास के रूप में,,
नंदीग्राम से राम के काज को,,
करने का निश्चय किया.....
तब ऐसे कठिन समय मे,,
अयोध्या की सुरक्षा का भार,,
राजकुमार श्री शत्रुघ्न पर आन पड़ा,,
श्री शत्रुघ्न ने चौदह वर्ष तक,,
श्री रामचंद्र की अयोध्या की,,
रक्षा के रूप में तपस्या करके,,
श्री रामचंद्र के परम भक्त,,
होने का प्रमाण दिया,,
चौदह वर्षों के इंतजार के बाद,,
श्री रामचंद्र का वनवास जब पूर्ण हुआ,,
तथा अयोध्या में श्री राम के राजतिलक
के साथ राम राज्य का फिर आरंभ हुआ!!
श्री रामचंद्र के राज्य में, अयोध्या में चारों ओर,,
शांति,समृद्धि न्याय और खुशहाली थी,,
अयोध्या में अब, हर दिन होली
एवं हर रात दिवाली थी,,
किंतु चक्रवर्ती सम्राट राजा रामचंद्र को,,
अपने राज्य में, मधुबन मथुरा क्षेत्र के पास,,
लवणासुर के आतंक उसके,,
अत्याचार के बारे में,,
जब ज्ञात हुआ !!
राजा रामचंद्र ने श्री शत्रुघ्न को,,
आदेश देकर भेजा !!
लवणासुर सें,, युद्ध करने को,,
श्री शत्रुघ्न ने अपने पराक्रम और,,
वीरता सें लवणासुर का अंत किया
राजा रामचंद्र ने, श्री शत्रुघ्न के,,
पराक्रम से प्रसन्न होकर,,
श्री शत्रुघ्न को मथुरा राज्य का,,
सम्राट घोषित किय !!
जब श्री रामचंद्र का कार्य,,
इस मृत्यु लोक में पूर्ण हुआ,....
उसी समय श्री राम के साथ
भरत तथा श्री, शत्रुघ्न ने भी,,
सरयू नदी में जल समाधि लेकर,,
वैकुंठ लोक प्रस्थान किया !!
कवि -, आकाश शर्मा आज़ाद"