एक जीती जागती देवी मेरे मन मंदिर में रहती है, मैं तो मम्मी कहती हूं दुनियां अम्मा माई कहती है । रख कोख में उसने पाला मुझको दुग्ध से ...
एक जीती जागती देवी मेरे मन मंदिर में रहती है,
मैं तो मम्मी कहती हूं दुनियां अम्मा माई कहती है ।
रख कोख में उसने पाला मुझको दुग्ध से अपने सीचा था,
मैंने कई बार उसकी गोद में लेटे उसके बालों को खींचा था,
न एक अस्थि की पीर सहोगे कई अस्थि का सहती है। एक जीती जागती...
बिन बोले मेरे दर्द समझती अपना कभी न बताती है,
चाहे जितना मै उसे खिझाऊं पर वह ना कभी सताती है,
संतति हित के लिए न जाने कितनी पूजा व्रत कर जाती है,
सही गलत है क्या है हितकर जननी ही समझती है,
जिसकी पूजा व्रत और दुआएं साथ में मेरे चलती है, ।एक जीती जागती देवी...
उम्र में चाहे बड़ी हो गई पर बच्ची हूं अभी वह मानती है,
दुनियादारी में अभी कच्ची हूं यह बात वही बस जानती है,
हंसते चेहरे को भी देखकर दर्द मेरे पहचानती है,
खुद से पहले ईश्वर से बच्चों की खुशियां मांगती है ,
अंदर से है कोमल पर मेरे लिए यह से भी लड़ती है ।एक जीती जागती देवी..
सब समझती है मां भोली पर गिनती उसे ना आती है,
एक घूंट एक कौर कह न जाने कितने कौर खिलाती है ,
ब्याह हो गया मैं भी मां हूं पर अभी बिटिया का कर बुलाती है,
जब तक घर ना पहुंचती हूं बार-बार फोन को मिलाती है ,
देर हो गई कब आएगी बस यही पूछती रहती है। एक जीती जागती देवी..
-सुधा पाण्डेय
मैं तो मम्मी कहती हूं दुनियां अम्मा माई कहती है ।
रख कोख में उसने पाला मुझको दुग्ध से अपने सीचा था,
मैंने कई बार उसकी गोद में लेटे उसके बालों को खींचा था,
न एक अस्थि की पीर सहोगे कई अस्थि का सहती है। एक जीती जागती...
बिन बोले मेरे दर्द समझती अपना कभी न बताती है,
चाहे जितना मै उसे खिझाऊं पर वह ना कभी सताती है,
संतति हित के लिए न जाने कितनी पूजा व्रत कर जाती है,
सही गलत है क्या है हितकर जननी ही समझती है,
जिसकी पूजा व्रत और दुआएं साथ में मेरे चलती है, ।एक जीती जागती देवी...
उम्र में चाहे बड़ी हो गई पर बच्ची हूं अभी वह मानती है,
दुनियादारी में अभी कच्ची हूं यह बात वही बस जानती है,
हंसते चेहरे को भी देखकर दर्द मेरे पहचानती है,
खुद से पहले ईश्वर से बच्चों की खुशियां मांगती है ,
अंदर से है कोमल पर मेरे लिए यह से भी लड़ती है ।एक जीती जागती देवी..
सब समझती है मां भोली पर गिनती उसे ना आती है,
एक घूंट एक कौर कह न जाने कितने कौर खिलाती है ,
ब्याह हो गया मैं भी मां हूं पर अभी बिटिया का कर बुलाती है,
जब तक घर ना पहुंचती हूं बार-बार फोन को मिलाती है ,
देर हो गई कब आएगी बस यही पूछती रहती है। एक जीती जागती देवी..
-सुधा पाण्डेय