अगर सफ़लता अर्जित करनी, कठोर परिश्रम करना होगा। भूल कष्ट अपने शरीर का,ध्यान लक्ष्य पर धरना होगा। तरह-तरह के रूप बदलकर,पथ में आएंगे ब...
अगर सफ़लता अर्जित करनी, कठोर परिश्रम करना होगा।
भूल कष्ट अपने शरीर का,ध्यान लक्ष्य पर धरना होगा।
तरह-तरह के रूप बदलकर,पथ में आएंगे बहु रोड़े,
मार हथौड़ा हर रोड़े पर,बिना रूके बस चलना होगा।।
अंधकार में आशा रूपी,दीपक जैसे जलना होगा।
जब तक मिलती नहीं सफलता, रात-रात भर जगना होगा।
कितनी भी बाधाएं आए, नहीं कभी भी घबराना है,
पड़े देह में छाले फिर भी, कड़ी धूप में खटना होगा।।
चोट लगे यदि तन पर कोई,घाव स्वयं ही भरना होगा।
आशावादी सोच पालकर,पथ में आगे बढ़ना होगा।
पाल निराशा मन में अपने,शीश पकड़कर नहीं बैठना,
मान जगत में पानें खातिर, उच्च शिखर पर चढ़ना होगा।।
बाँट नहीं कोई दुख लेगा,पीर स्वयं ही हरना होगा।
नहीं लोग देते खाने को,पेट स्वयं ही भरना होगा।
रहना है यदि सुखी हमेशा,रुपया-पैसा नाम कमाओ,
जीवन भी एक रणभूमि है,युद्ध अकेले लड़ना होगा।।
खरा स्वर्ण यदि बनना है तो, तेज आग में तपना होगा।
नहीं करोगे यदि कठोर श्रम, कैसे पूरा सपना होगा।
दूर काम से यदि भागोगे, नहीं सफलता कभी मिलेगी,
अगर सफ़लता पानी है तो,तुम्हें काम पर डटना होगा।।
-राम जी तिवारी"राम"
भूल कष्ट अपने शरीर का,ध्यान लक्ष्य पर धरना होगा।
तरह-तरह के रूप बदलकर,पथ में आएंगे बहु रोड़े,
मार हथौड़ा हर रोड़े पर,बिना रूके बस चलना होगा।।
अंधकार में आशा रूपी,दीपक जैसे जलना होगा।
जब तक मिलती नहीं सफलता, रात-रात भर जगना होगा।
कितनी भी बाधाएं आए, नहीं कभी भी घबराना है,
पड़े देह में छाले फिर भी, कड़ी धूप में खटना होगा।।
चोट लगे यदि तन पर कोई,घाव स्वयं ही भरना होगा।
आशावादी सोच पालकर,पथ में आगे बढ़ना होगा।
पाल निराशा मन में अपने,शीश पकड़कर नहीं बैठना,
मान जगत में पानें खातिर, उच्च शिखर पर चढ़ना होगा।।
बाँट नहीं कोई दुख लेगा,पीर स्वयं ही हरना होगा।
नहीं लोग देते खाने को,पेट स्वयं ही भरना होगा।
रहना है यदि सुखी हमेशा,रुपया-पैसा नाम कमाओ,
जीवन भी एक रणभूमि है,युद्ध अकेले लड़ना होगा।।
खरा स्वर्ण यदि बनना है तो, तेज आग में तपना होगा।
नहीं करोगे यदि कठोर श्रम, कैसे पूरा सपना होगा।
दूर काम से यदि भागोगे, नहीं सफलता कभी मिलेगी,
अगर सफ़लता पानी है तो,तुम्हें काम पर डटना होगा।।
-राम जी तिवारी"राम"