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दायरों की दुनिया( लेख) - The World of Circles

बिना सीमाओं के दुनिया, यह तो बस एक कल्पना मात्र लगती है क्योंकि इसके ज़मीनी, परिणाम बहुत ही विवादास्पद और डरावने हो सकते हैं। और शाय...

दायरों की दुनिया( लेख) - The World of Circles



बिना सीमाओं के दुनिया, यह तो बस एक कल्पना मात्र लगती है क्योंकि इसके ज़मीनी, परिणाम बहुत ही विवादास्पद और डरावने हो सकते हैं। और शायद बेहद चुनौतीपूर्ण भी।
क्योंकि सीमाएँ ना सिर्फ बाँटने का काम करती हैं अपितु, सुरक्षा प्रदान करने का कार्य भी करती है।

अगर दुनिया से सीमाएं खत्म हो गईं तो हो सकता है नागरिकता के विवाद खत्म हो जाए लोगों को आने जाने की आज़ादी मिल जाएगी। लोग अपनी मर्जी से एक देश से दूसरे देश आसानी से जा सकते हैं कोई पाबंदी नहीं होगी ।
आर्थिक समृद्धि और गरीबी भी संतुलित हो जाएगी क्योंकि लोग अपनी मर्जी से काम के लिए इधर उधर जा सकेंगे ।जहां उन्हें अधिक पारिश्रमिक मिलेगा।
युद्ध हो, भूकंप हो, महामारी हो, लोग तुरंत अपना देश छोड़कर दूसरे देश चले जाएँगे।
उन्हें किसी भी तरह के संकट का सामना करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
अलग अलग देशों के लोग अलग अलग देशों में रह सकेंगे ।उनकी संस्कृति उनका पहनावा उनका पहनावा खानपान बोली सब कुछ आसान हो जाएगा या यूं कह लीजिए संस्कृतियों का आपस में समन्वय बहुत अच्छे से हो जाएगा।

यह बात एक शब्द में कह लीजिए कि
""वासुदेव कुटुम्बकम्""।
ये शब्द पूरी दुनिया के लिए हो जाएगा।
लेकिन यह सब मात्र कल्पना और सुनने में अच्छा लगता है।

जैसे सीमाओं के फायदे हैं वैसे सीमाओं के नुकसान भी तो बहुत हैं।
सुरक्षा चक्र टूट जायेगा कोई भी घुसपैठिया कहीं पे भी घुस सकता है और सुरक्षा के घेरे को तोड़कर हानि पहुंचा सकता है।
महामारियों का संक्रमण बहुत तेजी से भी फैल सकता है। जैसे कोरोना के टाइम पे अगर सीमाएं तय नहीं होती तो संक्रमण से न जाने कितनी जाने चली गई होती।
लोग आर्थिक संपन्न देशों की ओर जाना पसंद करेंगे तो उनका अपना देश अब अपनी जगह कभी विकसित नहीं हो पाएगी।
सांस्कृतिक गतिविधियाँ के विलेनीकरण से संस्कृति की अपनी विशेषता ख़त्म हो जाएगी। जो लोग आज संस्कृति देखने, एक देश से दूसरे देश जाते हैं वह जाना बंद हो जाएगा।
हम कह सकते हैं कि बिना सीमाओं की दुनिया का विचार नैतिक और मानवीय रूप से बहुत ऊंचा है।

बहुत अच्छी लगती है। ये बात सोचने में की कोई पाबंदी न हो, कोई रोक टोक न हो सम।आजादी से रहे। यह सब बातें हमें मानवता का पाठ पढ़ाती हैं और बहुत भावनात्मक होती है।

लेकिन अगर हम आज की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था को देखते हुए सीमाओं को अचानक पूरी तरह खत्म कर दे तो दुनिया को एक बड़े में धकेलने के अलावा, यह कुछ भी नहीं है।

इससे दुनिया पर एक गहरा संकट हावी हो जाएगा, जिसके परिणाम बहुत भयानक होंगे, जिस पर काबू करना नामुमकिन हो जाएगा।

कायदे में रहेंगे तो फायदे में रहेंगे। यह बात सिर्फ बोलने में ही नहीं, बल्कि वास्तव में भी लागू होती है। हम हर चीज़ की सीमा तय नहीं कर सकते, लेकिन जहां आवश्यक है।वहां सीमा बंधन तोड़ भी नहीं सकते।

एक बेहतर दुनिया के लिए शायद सीमाओं को पूरी तरह खत्म करने के बजाय, उन्हें अधिक लचीला, मानवीय और व्यापार-अनुकूल बनाना अधिक व्यावहारिक कदम होगा।



-पायल शर्मा

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दैनिक साहित्य पत्रिका: दायरों की दुनिया( लेख) - The World of Circles
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