बारिश के बाद बरसात आई तो शहर भीग गया, जो दर्द था दिल में, वो भी सींच गया। कुछ बूंदें थीं आँखों की नमी जैसी, कुछ यादें थीं बारिश की क...
बारिश के बाद
बरसात आई तो शहर भीग गया,
जो दर्द था दिल में, वो भी सींच गया।
कुछ बूंदें थीं आँखों की नमी जैसी,
कुछ यादें थीं बारिश की कमी जैसी।
बादल गरजे तो आसमान रोया,
मिट्टी ने भी अपना दामन धोया।
हर पत्ता चमका, हर फूल खिला,
जैसे किसी को फिर से जीने का हौसला मिला।
बारिश ने कहा—रुकना मत, चलते रहो,
गिरना पड़े तो गिरो, मगर संभलते रहो।
रास्ते अगर पानी में डूब भी जाएँ,
नए रास्तों की तलाश में निकलते रहो।
कहीं बारिश खुशियों की सौगात बनी,
कहीं वही बारिश एक बरसात बनी।
कहीं खेतों में हरियाली आई,
कहीं बाढ़ ने बस्ती तक बहाई।
एक ही बादल, एक ही पानी,
फिर क्यों अलग हुई हर कहानी?
किसी के आँगन में खुशियाँ उतरीं,
किसी की आँखों से नींद ही बिखरी।
शायद मौसम का दोष नहीं होता,
हर सैलाब में रोष नहीं होता।
जो डूब गया, वो अंत नहीं है,
हर किनारा दूर हो—ये ज़रूरी नहीं है।
कल तक जो रास्ते धूल में छुपे थे,
आज वही पानी में धुले थे।
कल जिन पेड़ों पर थकान थी छाई,
आज उनकी शाखों पर हरियाली आई।
कल आसमान था धुंधला-धुंधला,
आज हर कोना लगता उजला-उजला।
कल जो दुनिया बेरंग लगी थी,
आज वही कुछ अलग लगी थी।
नज़र बदली तो नज़ारा बदल गया,
एक पल में पूरा किनारा बदल गया।
दुनिया वही थी, लोग वही थे,
बस देखने का हमारा इशारा बदल गया।
कभी ज़िंदगी भी बारिश बन जाती है,
कभी हँसाती है, कभी रुलाती है।
कभी बूंद-बूंद सुकून बरसाती है,
कभी सैलाब बनकर सब बहा ले जाती है।
मगर बारिश का भी एक उसूल है,
हर तूफ़ान के बाद मौसम कूल है।
बादल चाहे कितने भी घने हो जाएँ,
एक दिन सूरज फिर लौट आए।
जो आज टूटा है, कल जुड़ जाएगा,
जो आज रूठा है, कल मुड़ आएगा।
ये वक्त भी आखिर गुजर जाएगा,
हर सैलाब एक दिन उतर जाएगा।
तो बारिश से अब डरना कैसा,
गिरकर फिर से संभलना कैसा?
जो बह गया, उसे बह जाने दो,
जो बचा है, उसे मुस्कुराने दो।
क्योंकि बारिश सिर्फ पानी नहीं लाती,
ये मिट्टी में नई खुशबू भी लाती।
कुछ पुराने निशान मिटाती है,
कुछ नई कहानी लिख जाती है।
और जब अगली सुबह सूरज निकलेगा,
हर बूंद में उसका चेहरा दिखेगा।
तब समझ आएगा इस बारिश का राज़—
ज़िंदगी नहीं बदली थी,
बस बदल गया था उसे देखने का अंदाज़।
बारिश आई, बारिश गई,
कुछ खुशियाँ लाई, कुछ यादें गईं।
जो समझ सका वो मुस्कुरा दिया,
जो समझ न सका—वो भीगता रह गया।
क्योंकि ज़िंदगी भी बारिश की तरह है,
कभी धूप, कभी साज़िश की तरह है।
बस नज़र को थोड़ा बदलकर देखो—
हर तूफ़ान के पीछे
एक नई सुबह की तरह है।
-वास्तविक प्रकाश
बरसात आई तो शहर भीग गया,
जो दर्द था दिल में, वो भी सींच गया।
कुछ बूंदें थीं आँखों की नमी जैसी,
कुछ यादें थीं बारिश की कमी जैसी।
बादल गरजे तो आसमान रोया,
मिट्टी ने भी अपना दामन धोया।
हर पत्ता चमका, हर फूल खिला,
जैसे किसी को फिर से जीने का हौसला मिला।
बारिश ने कहा—रुकना मत, चलते रहो,
गिरना पड़े तो गिरो, मगर संभलते रहो।
रास्ते अगर पानी में डूब भी जाएँ,
नए रास्तों की तलाश में निकलते रहो।
कहीं बारिश खुशियों की सौगात बनी,
कहीं वही बारिश एक बरसात बनी।
कहीं खेतों में हरियाली आई,
कहीं बाढ़ ने बस्ती तक बहाई।
एक ही बादल, एक ही पानी,
फिर क्यों अलग हुई हर कहानी?
किसी के आँगन में खुशियाँ उतरीं,
किसी की आँखों से नींद ही बिखरी।
शायद मौसम का दोष नहीं होता,
हर सैलाब में रोष नहीं होता।
जो डूब गया, वो अंत नहीं है,
हर किनारा दूर हो—ये ज़रूरी नहीं है।
कल तक जो रास्ते धूल में छुपे थे,
आज वही पानी में धुले थे।
कल जिन पेड़ों पर थकान थी छाई,
आज उनकी शाखों पर हरियाली आई।
कल आसमान था धुंधला-धुंधला,
आज हर कोना लगता उजला-उजला।
कल जो दुनिया बेरंग लगी थी,
आज वही कुछ अलग लगी थी।
नज़र बदली तो नज़ारा बदल गया,
एक पल में पूरा किनारा बदल गया।
दुनिया वही थी, लोग वही थे,
बस देखने का हमारा इशारा बदल गया।
कभी ज़िंदगी भी बारिश बन जाती है,
कभी हँसाती है, कभी रुलाती है।
कभी बूंद-बूंद सुकून बरसाती है,
कभी सैलाब बनकर सब बहा ले जाती है।
मगर बारिश का भी एक उसूल है,
हर तूफ़ान के बाद मौसम कूल है।
बादल चाहे कितने भी घने हो जाएँ,
एक दिन सूरज फिर लौट आए।
जो आज टूटा है, कल जुड़ जाएगा,
जो आज रूठा है, कल मुड़ आएगा।
ये वक्त भी आखिर गुजर जाएगा,
हर सैलाब एक दिन उतर जाएगा।
तो बारिश से अब डरना कैसा,
गिरकर फिर से संभलना कैसा?
जो बह गया, उसे बह जाने दो,
जो बचा है, उसे मुस्कुराने दो।
क्योंकि बारिश सिर्फ पानी नहीं लाती,
ये मिट्टी में नई खुशबू भी लाती।
कुछ पुराने निशान मिटाती है,
कुछ नई कहानी लिख जाती है।
और जब अगली सुबह सूरज निकलेगा,
हर बूंद में उसका चेहरा दिखेगा।
तब समझ आएगा इस बारिश का राज़—
ज़िंदगी नहीं बदली थी,
बस बदल गया था उसे देखने का अंदाज़।
बारिश आई, बारिश गई,
कुछ खुशियाँ लाई, कुछ यादें गईं।
जो समझ सका वो मुस्कुरा दिया,
जो समझ न सका—वो भीगता रह गया।
क्योंकि ज़िंदगी भी बारिश की तरह है,
कभी धूप, कभी साज़िश की तरह है।
बस नज़र को थोड़ा बदलकर देखो—
हर तूफ़ान के पीछे
एक नई सुबह की तरह है।
-वास्तविक प्रकाश