बड़ी प्रतीक्षा बाद हमारे,अरमानों ने पर हैं पाए। आशाओं का हुआ सवेरा,जब से राम अवध में आए।। नहीं अभी जग में कोई था,पीर हमारी हरने वाला...
बड़ी प्रतीक्षा बाद हमारे,अरमानों ने पर हैं पाए।
आशाओं का हुआ सवेरा,जब से राम अवध में आए।।
नहीं अभी जग में कोई था,पीर हमारी हरने वाला।
सकल वेदना को पढ़ करके,घाव हृदय के भरने वाला।
संकट में जब मन घबराए,हाथ प्रेम सिर धरने वाला।
बीच भँवर जब नौका डोले,पार नाव को करने वाला।
सूखी बंजर धरती पर फिर,मेघ घने अति काले छाए।
आशाओं का हुआ सवेरा,जब से राम अवध में आए।।
युगों-युगों की प्यास मिटी है,मिटी वेदना सारे तन की।
बड़े दिनों के बाद हुई है, इच्छा पूरी मेरे मन की।
बस चाहत है राम दरश की, नहीं कामना मुझको धन की।
किस्मत आप सँवर जाएगी,पाकर धूल राम चरणन की।
नहीं और कुछ मन को भाता,राम राम बस मुझे सुहाए।
आशाओं का हुआ सवेरा,जब से राम अवध में आए।।
नहीं अन्न की होगी किल्लत,नहीं भूख से दीन मरेंगे।
अन्न-धन्न अगणित खुशियों से, सबके घर को राम भरेंगे।
कोई रोगी नहीं रहेगा,राम रोग सब दूर करेंगे।
प्रेम पूर्वक हाथ शीश धर,सबकी पीड़ा राम हरेंगे।
दोनों हाथों हमें लुटाने,संग अनेकों खुशियाँ लाए।
आशाओं का हुआ सवेरा,जब से राम अवध में आए।।
-राम जी तिवारी"राम"
आशाओं का हुआ सवेरा,जब से राम अवध में आए।।
नहीं अभी जग में कोई था,पीर हमारी हरने वाला।
सकल वेदना को पढ़ करके,घाव हृदय के भरने वाला।
संकट में जब मन घबराए,हाथ प्रेम सिर धरने वाला।
बीच भँवर जब नौका डोले,पार नाव को करने वाला।
सूखी बंजर धरती पर फिर,मेघ घने अति काले छाए।
आशाओं का हुआ सवेरा,जब से राम अवध में आए।।
युगों-युगों की प्यास मिटी है,मिटी वेदना सारे तन की।
बड़े दिनों के बाद हुई है, इच्छा पूरी मेरे मन की।
बस चाहत है राम दरश की, नहीं कामना मुझको धन की।
किस्मत आप सँवर जाएगी,पाकर धूल राम चरणन की।
नहीं और कुछ मन को भाता,राम राम बस मुझे सुहाए।
आशाओं का हुआ सवेरा,जब से राम अवध में आए।।
नहीं अन्न की होगी किल्लत,नहीं भूख से दीन मरेंगे।
अन्न-धन्न अगणित खुशियों से, सबके घर को राम भरेंगे।
कोई रोगी नहीं रहेगा,राम रोग सब दूर करेंगे।
प्रेम पूर्वक हाथ शीश धर,सबकी पीड़ा राम हरेंगे।
दोनों हाथों हमें लुटाने,संग अनेकों खुशियाँ लाए।
आशाओं का हुआ सवेरा,जब से राम अवध में आए।।
-राम जी तिवारी"राम"